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जवाहरलाल नेहरु राष्ट्रीय नवीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम)
वित्तीय रुप से सुदृढ़ परिपूर्ण शहरो को बनाने के
कार्य को
प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से भारत सरकार ने जवाहरलाल नेहरु राष्ट्रीय
नवीकरण
मिशन का प्रारम्भ दिसम्बर 2005 में किया था ।
मिशन का उद्देश्य इंफ़्रास्ट्रक्चर सेवाओं के विकास का एकीकरण, सुधारों के माध्यम से परिसम्पत्ति सृजन और परिसम्पत्ति
प्रबंधन के बीच सम्बन्ध स्थापित करना, शहरी इंफ़्रास्ट्रक्चर सेवाओं में कमियों
को पुरा करने के लिये पर्याप्त निधियाँ सुनिश्चित करना, पॅरी-अर्बन क्षेत्रों सहित चुनिंदा नगरो का नियोजित विकास, बाहरी विस्तार एवं शहरी कारीडोर के
फ़लस्वरुप बिखरा हुआ शहरीकरण, वहनीय मूल्यों पर पट्टे की प्रतिभुति सहित शहरी
गरीबों को बुनियादी सेवाओं का प्रावधान करना, विकसित आवास, जल आपुर्ति एवं सफ़ाई
तथा शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा हेतु सरकार की अन्य विद्यमान
सार्वजनिक सेवाओं की आपुर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान आकर्षित करना
है।
आवास एवं शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय में जेएनएनयूआरएम के
अंतर्गत शहरी गरीब को बुनियादी सेवाएं (बीएसयूपी) तथा एकिकृत आवास एवं स्लम
विकास कार्यक्रम (आईएचएसडीपी) पर कार्य किया जाता है।
शहरी गरीबों को बुनियादी सेवाएं
(बीएसयूपी)
पृष्ठभूमि
शहरी गरीबों को बुनियादी सेवाएं नामक कार्यक्रम चुंनिदा 63
मिशन नगरों में बदतर हालातों में रह रहे शहरी स्लमवासियों की हालातों में सुधार की
दृष्टि से आरम्भ किया गया था।
योजना का मुख्य उद्देश्य शहरी स्लमवासियों को समुचित
आश्रय और बुनियादी इंफ़्रास्ट्रक्चर सुविधाएं प्रदान करके स्वास्थ्य एवं अनुकुल
शहरी वातावरण सहित समग्र स्लम विकास हेतु प्रयास करना है। इसका मुख्य बल शहरी
शासन में सुधार को सुनिश्चित करना है ताकि शहरी निकाय/अर्ध्द-सरकारी एजेंसियाँ
वित्तिय रुप से सुदृढ़ हो सके, जिससे उनकी क्रेडिट रेटिंग में वृध्दि हो सके और
वे नए कार्यक्रमों को चलाने के लिये बाजार पूंजी की पंहुच के योग्य हो सके।
इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिये राज्य सरकारो, शहरी
स्थानिय निकायों तथा अर्ध्द-सरकारी एजेंसियों को सुधार के एजेंडा के
क्रियान्वयन को स्वीकार करना आवश्यक होगा । परियोजना प्रस्ताव को भुमि पट्टा,
आवास, जल आपूर्ति, सफ़ाई, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा सामाजिक सुरक्षा को शामिल करते
हुए परिभाषित 7 प्वाइंट चार्टर को पूरा करना चाहिए।
वित्तपोषण प्रणाली
एक मिलियन से अधिक की आबादी वाले नगरों के लिए केन्द्र और
राज्य का शेयर 50:50 के अनुपात में होगा। अन्य नगरों के मामले में (सिक्किम
सहित उत्तर पूर्वी राज्यों को छोडकर) अनुपात 80:20 तथा सिक्किम सहित
उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए 90:10 है।
एकीकृत आवास एवं स्लम विकास कार्यक्रम
(आईएचएसडीपी)
पृष्ठभूमि
एकीकृत आवास एवं स्लम विकास कार्यक्रम (आईएचएसडीपी) बीएसयूपी
के अन्तर्गत आवृत 63 चुंनिदा मिशन शहरों को छोडकर शेष सभी नगरों को लाभान्वित करते
हुए शहरी स्लमवासियों की बदतर हालातों में सुधार की दृष्टि से आरम्भ किया गया
था।
विद्यमान वाल्मीकि अम्बेडकर आवास योजना (वाम्बे) तथा बन्द
कर दिए गए राष्ट्रिय स्लम विकास कार्यक्रम (एनएसडीपी) को आईएचएसडीपी में समाहित
कर दिया गया, जिसका उद्देश्य शहरी स्लमवासियों को समुचित आश्रय और बुनियादी
इंफ़्रास्ट्रक्चर सुविधाएं प्रदान करते हुए स्वच्छ एवं अनुकुल शहरी वातावरण सहित
समग्र स्लम विकास हेतु प्रयास करना है। इसका मुख्य बल शहरी शासन में सुधार को
सुनिश्चित करना है, ताकी शहरी स्थानिय निकाय/अर्ध्द-सरकारी एजेंसियाँ वित्तिय
रुप से सुदृढ़ हो सके । परियोजना प्रस्ताव को भूमि पट्टा, आवास, जल, आपुर्ति,
सफ़ाई, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा सामाजिक सुरक्षा को शामिल करते हुए परिभाषित 7
प्वाइंट चार्टर को पुरा करना चाहिए ।
वित्तपोषण प्रणाली
योजना के अन्तर्गत, केन्द्र और राज्य का शेयर 80:20 के
अनुपात में होगा परन्तु विशेष श्रेणी राज्यों के लिए (उत्तर पूर्वी राज्यों एवं
पर्वतीय राज्यों अर्थात हिमाचल प्रदेश, जम्मू व कश्मीर, उत्तरांचल और सिक्किम) केन्द्र
और राज्यों के बीच वित्तपोषण अनुपात 90:10 होगा ।
रिहायशी यूनिटों के लिए लागत सीमा 80,000/- रुपये प्रति
यूनिट है । विशेष श्रेणी/पर्वतीय राज्यों तथा दुर्गम/दूर दराज के क्षेत्रों के लिए प्रति रिहायशी यूनिट लागत
निर्धारित लागत सीमा से 12.5% अतिरिक्त मान्य है ।
हडको की भूमिका
आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्गों और् वंचित तबके को मकान
उपलब्ध कराने के अपने सामाजिक उद्देशय के अनुरुप हडको लाभार्थियों के मिशन उद्देश्य तक पहुंचते हुए अहम भूमिका अदा कर रहा है ।
इस भूमिका में विभिन्न राज्यों में प्रशिक्षणों/कार्यशालाओं के माध्यम से
जेएनएनयूआरएम संबंधी सूचना का प्रसारण ; कुशल आवास तथा सामाजिक आर्थिक एवं
लाभार्थियों की जीवन-यापन जरुरतों जैसे समुदाय केन्द्रों, जीवन-यापन केन्द्र,
व्यवसायिक जगहों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों एवं अनौपचारिक शिक्षा केन्द्रो
इत्यादि पर आधारित जरुरतों की व्यवस्था करने जैसे क्षेत्रों में तकनीकी एवं
डिजाइन परामर्श देते हुए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट बनाने में राज्य सरकार/क्रियान्वयन
एजेन्सियों की सहायता ; लागत प्रभावी इन्फ़्रास्ट्रक्चर सेवाएं जैसे बरसाती जल
संरक्षण एवं ठोस कचरा प्रबंधन इत्यादी ; मंत्रालय द्वारा स्वीकृति के लिए
विचारार्थ भारत सरकार के दिशा निर्देशों एवं निदेशों के अनुरुप राज्यों से प्राप्त परियोजनाओं का मूल्यांकन शामिल है ।

31.03.2008 को हडको ने बीएसयूपी के अंन्तर्गत 10895.19
करोड रुपये की परियोजना लागत की 151 परियोजनाओं तथा आईएचएसडीपी के अंतर्गत
3979.21 करोड रुपये की परियोजना लागत की 417 परियोजनाओं का मूल्यांकन किया है
और मंत्रालय की ओर से स्वीकृति दी गई है ।
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