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प्राकृतिक आपदाओं एवं विनाश से प्रभावी क्षेत्रों के पुनर्निर्माण/पुनर्बसाव कार्यक्रम के लिए हडको की तकनीकी-वित्तीय सहायता

हमारा देश विभिन्न प्राकृति आपदाओं जैसे उत्तर के पर्वतीय क्षेत्रों, उत्तर-पूर्वी राज्यों तथा गुजरात के कच्छ क्षेत्र, महाराष्ट्र के कोयना और लातूर में भूकम्प एवं भूस्खलनों, तटीय राज्यों में समुद्री ज्वार, समुद्र कटाव तथा बाढ़ और कई राज्यों के बाढ़ से होने वाले नुकसानों से प्रभावित है । प्रत्येक प्राकृतिक आपदा के बाद जान-माल का भारी नुकसान होता है जो काफी बड़ी संख्या में परिवारों को बेघर बना देता है तथा समुदाय के समुदाय बुनियादी, सामाजिक और उपयोगी इंफ्रास्ट्रक्चर से वंचित हो जाते हैं । इन लोगों के पुनर्वास एवं पुननिर्माण, मरम्मत तथा विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा की जा रही अन्य जरूरी सहायता में हडको ने पुनर्बसाव आवास योजनाओं हेतु अपनी विशेष ऋणएवं तकनीकी सहायता प्रदान की है । हडको की सहायता ने प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित 41.14 लाख परिवारों के पुनर्वास में सहायता की है ।

प्राकृतिक आपदाएं

योजनाओं की संख्या

हडको ऋण राशि

भूकम्प

36

84.27

समुद्री तूफान

163

715.14

बाढ़

282

1159.24

वित्तीय सहायता के अतिरिक्त, हडको ने भूकम्प प्रतिरोधी, तूफान प्रतिरोधी तथा बाढ़ सुरक्षित आवास विकल्पों के लिए आवश्यक उपयुक्त प्रौद्योगिकीय पैकेजो की पहचान करने में भी मुख्य भूमिका निभाई है । यह कार्य सीबीआरआई, एसईआरसी, आरआरएल जैसे विभिन्न अनुसंधान, विकास एवंप्रौद्योगिकी संस्थानों तथा प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालयों में किए गए अनुसंधान एवं विकास कार्यों और राष्ट्रीय भवन कोड तथा भूकम्प एवं पवन अवरोधी निर्माण के लिए विशेष डिजाइन एवं निर्माण कोड के माध्यम से भारतीय मानक ब्यूरो के कार्य पर आधारित है । इसके अलावा इन निष्कर्षों को विभिन्न प्रौद्योगिकियों/स्थानीय तौर पर उपलब्ध भवन सामग्रियों का इस्तेमाल करते हुए आपदा अवरोधी निर्माण कार्य के लिए क्या करें और क्या न करें के मैनुअलों और उपभोक्ता उपयोगी चित्रात्मक दिशा-निर्देशों में परिवर्तित किया जाता है ।

  • उत्तर-प्रदेश के पहाड़ी जिलों में भूकम्प प्रभावितों के पुनर्वास के लिए हडको की सहायता ।
  • लातूर और उस्मानाबाद में भूकम्प प्रभावितों के पुनर्वास के लिए हडको की सहायता ।
  • जबलपुर में भूकम्प प्रभावितों के पुनर्वास के लिए हडको की सहायता ।
  • उडीसा में घनघोर समुद्री तूफान से प्रभावितों के पुनर्वास के लिए हडको की सहायता ।
  • गुजरात के भूकम्प प्रभावित क्षेत्रों में जनमानस के पुनर्वास के लिए हडको की सहायता ।

इसके अलावा प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों में विशेष निर्मिति केन्द्रों की स्थापना के लिए समुचित प्रौद्योगिकियों को इस्तेमाल करते हुए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल दर्शाने एवं सस्ते मकानों के निर्माण में स्थानीय कारीगरों के प्रशिक्षण के लिए विशेष प्रयास भी किए गए हैं । इन निर्मिति केन्द्रों ने स्थानीय कारीगरों को प्रशिक्षण, भवन सामग्रियों के निर्माण तथा निर्माण कार्य में सहायता देते हुए आवासीय वितरण प्रणाली में योगदान देने के साथ-साथ आवास से संबंधित जरूरी मार्गदर्शन एवं सूचना देने और स्थानीय जनता को क्षतिग्रस्त मकानों एवं भवनों की मरम्मत, नवीनीकरण एवं उनके पुनरुद्धार के लिए परामर्श देने में उल्लेखनीय भूमिका अदा की है ।

इसके अलावा हडको ने क्षेत्र विशेष की जरूरतों के आधार पर आपदा अवरोधी विशेषताओं का इस्तेमाल करते हुए प्रदर्शक मकानों के निर्माण करने में भी सीधा योगदान दिया है और पूरी तरह नष्ट हो गए ग्रामों/शहरी बस्तियों के पुनर्निर्माण की आदर्श ग्राम एवं आदर्श बस्ती विकास योजना के अंतर्गत अनेक ग्रामों एवं शहरी बस्तियों को भी गोद लिया है ।

हडको के मानव बसाव प्रबंधन संस्थान नामक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण विभाग ने सरकारी अधिकारियों, विभिन आवासीय एजेन्सियों के कार्यकारी अधिकारियों और निर्माण क्षेत्र में कार्यरत व्यावसायिकों को प्रशिक्षण दिलवाने, क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का आयोजन करने और आपदा से बचाव के विभिन्न तथ्यों के प्रति जागरूकता पैदा करने में भी मुख्य भूमिका अदा की है ।

उत्तर-प्रदेश के पहाड़ी जिलों में भूकम्प प्रभावितों के पुनर्वास के लिए हडको की सहायता

उत्तरांचल राज्य (इससे पहले उत्तर-प्रदेश राज्य) के पहाड़ी जिलों के उत्तरकाशी (1991) तथा चमोली/रुद्रप्रयाग/टिहरी-पौढ़ी गढ़वाल (1999) में दो भारी भूकम्प आए हैं । चमोली क्षेत्र में आए भूकम्प को रिकटर पैमाने पर 6.8 मापा गया । हडको ने 20,000 परिवारों को मकान सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अपनी वित्तीय सहायता का प्रस्ताव किया है और समुचित प्रौद्योगिकी अंतरण का प्रशिक्षण दिलवाने के लिए विशेष निर्मिति केन्द्र भी स्थापित किए हैं । हडको ने रुद्रप्रयाग में कंसाली, गोपेश्वर में गिगराना के गाँव भी गोद लिए है और चमोली में हरिजन बस्ती का सुधार किया है । इसके अलावा विभिन्न आपदा अवरोधी प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित करने के लिए विभिन्न जगहों पर 21 प्रदर्शन यूनिट भी लगाए गए थे ।हडको ने आपदा प्रभावी जिलों में प्रौद्योगिकियों के प्रचार-प्रसार के लिए 11 निर्मिति केन्द्र स्थापित किए । हडको ने इस क्षेत्र में आपदा अवरोधी भवन प्रौद्योगिकियों की विशेषताओं से परिचित कराने के लिए 175 इंजीनियरों और सैकडों कारीगरों को प्रशिक्षण दिया । इसके अलावा हडको ने पहाड़ी क्षेत्रों के लिए भूकम्प अवरोधी मकानों को बनाने में सहायकक्या करें और क्या न करें नामक मैनुअल तैयार किए तथा इनका व्यापक वितरण/प्रचार-प्रसार भी किया गया ।

हडको, चमोली और रुद्रप्रयाग के भूकम्प प्रभावी क्षेत्रों में मकानों के पुनर्बसाब के कार्य में जुटे कार्य दल के साथ भी सक्रियता से जुड़ा रहा है और हडको के अध्यक्ष एवं प्रबन्ध निदेशक इस कार्य दल के अध्यक्ष थे । उत्तराखड के भूकम्प से बार-बार प्रभावित होने वाले क्षेत्रों केलिए आपदा प्रबंधन प्लान सहित तुरन्त प्रभावी, दीर्घ अवधि, मध्य अवधि और दीर्घ अवधि का व्यापक एक्शन प्लान भी बनाया गया है ।

लातूर और उस्मानाबाद में भूकम्प प्रभावितों के पुनर्वास के लिए हडको की सहायता

वर्ष 1993 में एक भारी भूकम्प ने लातूर और उस्मानाबाद क्षेत्रों पर हमला किया जिसे रिक्टर पैमाने पर 6.4 आंका गया, जिसका मुख्य केन्द्र लातूर का किल्लारी गाँव था और इससे अभूतपूर्व विनाश हुआ तथा 10,000 लोगों की जान गई । हडको ने ताप्सी, उत्का, तुंगी और तेम्भी नामक 4 गाँव को गोद लिया और जर्मनी सरकार तथा जर्मनी के केएफडब्ल्यू के साथ मिलकर संयुक्त रूप से सहयोगी कार्यक्रम के रूप में 20 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता से भूकम्प प्रभावी जनता केलिए 1319 मकानों का निर्माण किया ।

हडको ने लातूर और उस्मानाबाद जिलों में 10 निर्मिति केन्द्र भी स्थापित किए जिन्होंने इन दोनों जिलों में विभिन्न एजेन्सियों की ओर से चलाए जा रहे व्यापक पुनर्निनिर्माण कार्य के लिए अपेक्षित दीवार, छत एवं अन्य निर्माण सामग्री के उत्पादन और भूकम्प अवरोधी निर्माण कार्य करने में स्थानीय जनता को प्रशिक्षण दिलवाने में मुख्य भूमिका अदा की है । हडको ने पुनर्निर्माण कार्य तथा मकानों की मरम्मत एवं उनके नवीनीकरण के लिए हिन्दी में क्या करें और क्या न करें दिशा-निर्देश जैसे विशेष पर्चे भी निकाले है ।

लातूर जिले तथा तेम्भी गाँव में भूकम्प प्रभावितों के पुनर्बसाव के लिए हडको के लातूर पुनर्निर्माण कार्यक्रम की विशेष प्रशंसा की गई है और इसे यूकेके बिल्डिंग एंड सोशल हाउसिंग फाऊन्डेशन से वर्ल्ड हैबीटाट अवार्ड 1996 मिला है । इसे पुनर्बसाव परियोजना की श्रेणी के अंतर्गत लातूर के भूकम्प प्रभावितों की पुनर्बसाव परियोजना के लिए जेके सीमेन्ट का “आर्किटेक ऑफ दि ईयर 1997” मिला है । हडको को महाराष्ट्र के भूकम्प प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्बवास कार्य के लिए शील्ड ऑफ एप्रीसिएशन पुरस्कार भी मिला है ।

जबलपुर में भूकम्प प्रभावितों के पुनर्वास के लिए हडको की सहायता

रिक्टर पैमाने पर 6.1 के झटके वाले भूकम्प ने 1997 में जबलपुर पर प्रहार किया, जिसका मुख्य केन्द्र कोशमघाट ग्राम था जिसकी वजह से संपत्ति की व्यापक क्षति हुई ।

हडको ने इस विपदा में 7424 मकानों के निर्माण कार्य तथा 12773 यूनिटों की मरम्मत और पुनरुद्धार के लिए 58 करोड़ रुपये की सहायता दी है । हडको ने भूकम्प प्रभावित क्षेत्रों में 5 निर्मिति केन्द्र स्थापित करने में मदद की है । हडको ने अपनी तकनीकी और वित्तीय मदद से कोसमगढ और गूना नामक 2 ग्रामों को आदर्श ग्राम के रूप में पुनविकसित करने के लिए इन्हें गोद भी लिया है । पुनर्निर्माण, मरम्मत और नवीनीकरण का कार्य करने के लिए हिन्दी में विशेष पर्चे निकाले गए है और इन्हें जबलपुर के शहरी क्षेत्रों में बाँटा गया है तथा चिनाई एवं मिट्टी का इस्तेमाल करते हुए आरसीसी निर्माण पद्धति से निर्माण का कार्य करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष पर्चे बाँटे गए हैं ।

उडीसा में घनघोर समुद्री तूफान से प्रभावितों के पुनर्वास के लिए हडको की सहायता

250 कि.मी. प्रति घण्टा की रफ्तार से चलने वाली हवा के साथ घनघोर समुद्री-तूफान ने अक्टूबर, 1999 में उड़ीसा के तटीय क्षेत्र पर हमला किया, जिसने राज्य के 15 जिलों को बुरे तरीके से प्रभावित किया है । मकानों के नुकसान के अलावा, 14,000 प्राथमिक स्कूल और अन्य सार्वजनिक सांस्थानिक भवनों को भी इससे क्षति पहुँची । हडको ने 3.25 लाख मकानों के निर्माण के लिए 1287.5 करोड़ रुपये की कुल वित्तीय सहायता दी है और निर्मिति केन्द्रों को बढावा देने एवं आदर्श ग्रामों के लिए 3.9 करोड़ रुपए की अतिरिक्त सहायता दी है । हडको ने तूफान प्रभावित क्षेत्रों में 20 विशेष निर्मिति केन्द्रों को स्थापित करने में भी मदद दी है । चार ग्रामों को आदर्श ग्रामों के रूप में गोद लिया गया है । इसके लिए क्या करें और क्या न करें मैनुअल को भी उड़िया भाषा में तैयार किया गया और इसमें तूफान अवरोधी निर्माण पद्धतियों एवं समुचित प्रौद्योगिकियों को उल्लेख किया गया है । उड़ीसा के सभी तूफान प्रभावित जिलों में स्कूल भवनों के निर्माण कार्य के लिए हडको की तकनीकी सहायता भी दी जा रही है ।

उड़ीसा में प्रभावित सभी जिलों में विद्यालय भवनों का निर्माण

गुजरात के चक्रवात प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास हेतु हडको की सहायता

6.9 रिक्टर स्केल पर आये व्यापक भूकंप ने भुज से 20 कि.मी. दूर भूकंपीय क्षेत्र से गुजरात के विभिन्न कस्बों एवं ग्रामों को अपनी चपेट में ले लिया । प्रारंभिक मूल्यांकन के आधार पर इस भूकंप से हुई जान माल एवं मकानों की क्षति के समग्र हानि मूल्यांकन से यह देखा गया कि इसमें लगभग 3000 लोगों की जान चली गई एवं करीब 175,000 आवास पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हो गए जिनके पुर्ननिर्माण की जरूरत महसूस की गई एवं एक मिलियन से अधिक आवास, जो आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं उनकी भी मरम्मत एवं नवीकरण करने की जरुरत महसूस की गई।

आवासों एवं भवनों की क्षतियों के तत्काल निर्धारण, वित्तीय सहायता, समुचित प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान, भूकंपरोधी प्रौद्योगिकियों को सम्मिलित करते हुए आपदारोधी आवास को प्रदर्शित करने के लिए भवन एवं सामुदायिक केन्द्रों की स्थापना, ग्रामों को अपनाने एवं व्यापक विकास हेतु बस्तियाँ तथा भुज में हडको कार्यालय खोलने पर बल देते हुए व्यापक बृहत एक्शन प्लान तैयार किया गया तथा गुजरात के भूकंप प्रस्तावित क्षेत्र के लिए बृहत पुनर्वास तथा पुनर्निर्माण कार्यक्ऱम हेतु तकनीकी वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए अंजार को चुना गया ।

पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त आवासों, आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त आवासों की मरम्मत एवं उनका नवीकरण तथा विद्यमान वहनीय स्टाक के निर्माण हेतु गुणवत्ता एवं प्रमात्रा दोनों नजरिये से क्षतियों का तत्काल मूल्यांकन बहुत ही कम समय में राज्य सरकारों के सहयोग से हडको एवं बीएमटीपीसी एक्शन प्लान के अनुसार कार्य करेंगे ।

समग्र निर्धारण पर आधारित, क्षतिग्रस्त सड़कों एवं जल आपूर्ति, शौचालय एवं नागरिक सुविधाओं जैसे इन्फ्ऱास्ट्रक्चर के पुर्नविकास के लिए ग्रामीण, अर्ध शहरी एवं शहरी क्षेत्रों में विभिन्न आय श्रेणियों के आवासों के पुर्ननिर्माण हेतु कार्यक्रम का निर्णय राज्य सरकार द्वारा लिया जाएगा एवं इस कार्य के लिए वित्तीय सहायता हडको द्वारा दी जाएगी । वित्तीय सहायता की कुल सीमा 1500 करोड़ रुपये तक होगी जो राज्य सरकार एवं इसकी विभिन्न एजेन्सियों द्वारा जरूरत को ध्यान में रखते हुए सहायता सीमा पर आधारित रखते हुए दीजाएगी ।

मिट्टी, पत्थर, ईंट, कंक्ऱीट आदि जैसी स्थानीय भवन निर्माण सामग्रियों को उपयोग में लाते हुए पुर्न-भवन भूकंपरोधी आवासों के लिए आवश्यक समुचित प्रौद्योगिकी पैकेज से भरपूर हडको की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी ।

साथ ही, शहरों एवं कस्बों तथा ग्रामों में भूकंपरोधी प्रौद्योगिकियों के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से हडको एवं बीएमटीपीसी प्रौद्योगिकी अंतरण, स्थानीय राज कारीगरों को प्रशिक्षण, भवन निर्माण सामग्रियों एवं संघटक, निर्माण सहायता तथा लोगों को सूचना एवं मार्गदर्शन के लिए सभी आपदा प्रभावित जिलों में 30 बिल्डिंग सेंटर, प्रदर्शन आवास निर्माण एवं सामुदायिक भवनों की स्थापना के लिए सहायता देंगे ।

हडको पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त ग्रामों एवं बस्तियों के व्यापक विकास के लिए कुछ मॉडल ग्राम एवं बस्तियों को भीअपनाएगा । इसके अलावा, हडको अत्यधिक प्रभावित क्षेत्रों, भुज एवं अंजार में तत्काल अपने फील्ड परियोजना प्रबंधक कार्यालय खोलेगा । यह भी निर्णय लिया गया है कि हडको से सहायता अस्थायी आश्रयों के निर्माण हेतु उपलब्ध रहेगी ।

ग्राम और कस्बे, जो व्यापक रूप में क्षतिग्रस्त हैं, उनके संबंध में, यह भी प्रस्तावित है कि समस्त ग्राम या कस्बा का निर्माण न केवल आवास एवं अन्य सामुदायिक सुविधाओं के संबंध में नजदीक में ही नई जगह में ही किया जाता है बल्कि विद्यमान संकरे रास्तों के स्थान पर चौड़ी सड़कें प्रदान करने के उद्देश्य से किया जाता है तथा इनमें अन्य आपदारोधी सुरक्षा मापन समाहित किए जा रहे हैं ।

आपदा न्यूनीकरण एवं वहनीयता एटलस आफ इंडिया । संपूर्ण जानकारी के लिए www.bmtpc.org/disaster.htm