प्राकृतिक आपदाएं |
योजनाओं की संख्या |
हडको ऋण राशि |
भूकम्प |
36 |
84.27 |
समुद्री तूफान |
163 |
715.14 |
बाढ़ |
282 |
1159.24 |
वित्तीय सहायता के अतिरिक्त, हडको ने भूकम्प प्रतिरोधी, तूफान प्रतिरोधी तथा बाढ़ सुरक्षित आवास विकल्पों के लिए आवश्यक उपयुक्त प्रौद्योगिकीय पैकेजो की पहचान करने में भी मुख्य भूमिका निभाई है । यह कार्य सीबीआरआई, एसईआरसी, आरआरएल जैसे विभिन्न अनुसंधान, विकास एवंप्रौद्योगिकी संस्थानों तथा प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालयों में किए गए अनुसंधान एवं विकास कार्यों और राष्ट्रीय भवन कोड तथा भूकम्प एवं पवन अवरोधी निर्माण के लिए विशेष डिजाइन एवं निर्माण कोड के माध्यम से भारतीय मानक ब्यूरो के कार्य पर आधारित है । इसके अलावा इन निष्कर्षों को विभिन्न प्रौद्योगिकियों/स्थानीय तौर पर उपलब्ध भवन सामग्रियों का इस्तेमाल करते हुए आपदा अवरोधी निर्माण कार्य के लिए क्या करें और क्या न करें के मैनुअलों और उपभोक्ता उपयोगी चित्रात्मक दिशा-निर्देशों में परिवर्तित किया जाता है ।
- उत्तर-प्रदेश के पहाड़ी जिलों में भूकम्प प्रभावितों के पुनर्वास के लिए हडको की सहायता ।
- लातूर और उस्मानाबाद में भूकम्प प्रभावितों के पुनर्वास के लिए हडको की सहायता ।
- जबलपुर में भूकम्प प्रभावितों के पुनर्वास के लिए हडको की सहायता ।
- उडीसा में घनघोर समुद्री तूफान से प्रभावितों के पुनर्वास के लिए हडको की सहायता ।
- गुजरात के भूकम्प प्रभावित क्षेत्रों में जनमानस के पुनर्वास के लिए हडको की सहायता ।
इसके अलावा प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों में विशेष निर्मिति केन्द्रों की स्थापना के लिए समुचित प्रौद्योगिकियों को इस्तेमाल करते हुए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल दर्शाने एवं सस्ते मकानों के निर्माण में स्थानीय कारीगरों के प्रशिक्षण के लिए विशेष प्रयास भी किए गए हैं । इन निर्मिति केन्द्रों ने स्थानीय कारीगरों को प्रशिक्षण, भवन सामग्रियों के निर्माण तथा निर्माण कार्य में सहायता देते हुए आवासीय वितरण प्रणाली में योगदान देने के साथ-साथ आवास से संबंधित जरूरी मार्गदर्शन एवं सूचना देने और स्थानीय जनता को क्षतिग्रस्त मकानों एवं भवनों की मरम्मत, नवीनीकरण एवं उनके पुनरुद्धार के लिए परामर्श देने में उल्लेखनीय भूमिका अदा की है । इसके अलावा हडको ने क्षेत्र विशेष की जरूरतों के आधार पर आपदा अवरोधी विशेषताओं का इस्तेमाल करते हुए प्रदर्शक मकानों के निर्माण करने में भी सीधा योगदान दिया है और पूरी तरह नष्ट हो गए ग्रामों/शहरी बस्तियों के पुनर्निर्माण की आदर्श ग्राम एवं आदर्श बस्ती विकास योजना के अंतर्गत अनेक ग्रामों एवं शहरी बस्तियों को भी गोद लिया है । हडको के मानव बसाव प्रबंधन संस्थान नामक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण विभाग ने सरकारी अधिकारियों, विभिन आवासीय एजेन्सियों के कार्यकारी अधिकारियों और निर्माण क्षेत्र में कार्यरत व्यावसायिकों को प्रशिक्षण दिलवाने, क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का आयोजन करने और आपदा से बचाव के विभिन्न तथ्यों के प्रति जागरूकता पैदा करने में भी मुख्य भूमिका अदा की है । उत्तर-प्रदेश के पहाड़ी जिलों में भूकम्प प्रभावितों के पुनर्वास के लिए हडको की सहायता उत्तरांचल राज्य (इससे पहले उत्तर-प्रदेश राज्य) के पहाड़ी जिलों के उत्तरकाशी (1991) तथा चमोली/रुद्रप्रयाग/टिहरी-पौढ़ी गढ़वाल (1999) में दो भारी भूकम्प आए हैं । चमोली क्षेत्र में आए भूकम्प को रिकटर पैमाने पर 6.8 मापा गया । हडको ने 20,000 परिवारों को मकान सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अपनी वित्तीय सहायता का प्रस्ताव किया है और समुचित प्रौद्योगिकी अंतरण का प्रशिक्षण दिलवाने के लिए विशेष निर्मिति केन्द्र भी स्थापित किए हैं । हडको ने रुद्रप्रयाग में कंसाली, गोपेश्वर में गिगराना के गाँव भी गोद लिए है और चमोली में हरिजन बस्ती का सुधार किया है । इसके अलावा विभिन्न आपदा अवरोधी प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित करने के लिए विभिन्न जगहों पर 21 प्रदर्शन यूनिट भी लगाए गए थे ।हडको ने आपदा प्रभावी जिलों में प्रौद्योगिकियों के प्रचार-प्रसार के लिए 11 निर्मिति केन्द्र स्थापित किए । हडको ने इस क्षेत्र में आपदा अवरोधी भवन प्रौद्योगिकियों की विशेषताओं से परिचित कराने के लिए 175 इंजीनियरों और सैकडों कारीगरों को प्रशिक्षण दिया । इसके अलावा हडको ने पहाड़ी क्षेत्रों के लिए भूकम्प अवरोधी मकानों को बनाने में सहायकक्या करें और क्या न करें नामक मैनुअल तैयार किए तथा इनका व्यापक वितरण/प्रचार-प्रसार भी किया गया । हडको, चमोली और रुद्रप्रयाग के भूकम्प प्रभावी क्षेत्रों में मकानों के पुनर्बसाब के कार्य में जुटे कार्य दल के साथ भी सक्रियता से जुड़ा रहा है और हडको के अध्यक्ष एवं प्रबन्ध निदेशक इस कार्य दल के अध्यक्ष थे । उत्तराखड के भूकम्प से बार-बार प्रभावित होने वाले क्षेत्रों केलिए आपदा प्रबंधन प्लान सहित तुरन्त प्रभावी, दीर्घ अवधि, मध्य अवधि और दीर्घ अवधि का व्यापक एक्शन प्लान भी बनाया गया है । लातूर और उस्मानाबाद में भूकम्प प्रभावितों के पुनर्वास के लिए हडको की सहायता वर्ष 1993 में एक भारी भूकम्प ने लातूर और उस्मानाबाद क्षेत्रों पर हमला किया जिसे रिक्टर पैमाने पर 6.4 आंका गया, जिसका मुख्य केन्द्र लातूर का किल्लारी गाँव था और इससे अभूतपूर्व विनाश हुआ तथा 10,000 लोगों की जान गई । हडको ने ताप्सी, उत्का, तुंगी और तेम्भी नामक 4 गाँव को गोद लिया और जर्मनी सरकार तथा जर्मनी के केएफडब्ल्यू के साथ मिलकर संयुक्त रूप से सहयोगी कार्यक्रम के रूप में 20 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता से भूकम्प प्रभावी जनता केलिए 1319 मकानों का निर्माण किया । हडको ने लातूर और उस्मानाबाद जिलों में 10 निर्मिति केन्द्र भी स्थापित किए जिन्होंने इन दोनों जिलों में विभिन्न एजेन्सियों की ओर से चलाए जा रहे व्यापक पुनर्निनिर्माण कार्य के लिए अपेक्षित दीवार, छत एवं अन्य निर्माण सामग्री के उत्पादन और भूकम्प अवरोधी निर्माण कार्य करने में स्थानीय जनता को प्रशिक्षण दिलवाने में मुख्य भूमिका अदा की है । हडको ने पुनर्निर्माण कार्य तथा मकानों की मरम्मत एवं उनके नवीनीकरण के लिए हिन्दी में क्या करें और क्या न करें दिशा-निर्देश जैसे विशेष पर्चे भी निकाले है । लातूर जिले तथा तेम्भी गाँव में भूकम्प प्रभावितों के पुनर्बसाव के लिए हडको के लातूर पुनर्निर्माण कार्यक्रम की विशेष प्रशंसा की गई है और इसे यूकेके बिल्डिंग एंड सोशल हाउसिंग फाऊन्डेशन से वर्ल्ड हैबीटाट अवार्ड 1996 मिला है । इसे पुनर्बसाव परियोजना की श्रेणी के अंतर्गत लातूर के भूकम्प प्रभावितों की पुनर्बसाव परियोजना के लिए जेके सीमेन्ट का “आर्किटेक ऑफ दि ईयर 1997” मिला है । हडको को महाराष्ट्र के भूकम्प प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्बवास कार्य के लिए शील्ड ऑफ एप्रीसिएशन पुरस्कार भी मिला है । |