बाँस एक
प्रकार की घास है, जो मजबूत, बहु-उपयोगी और बहुत ही नवीकरणीय
संसाधन है । भारत बाँस की अक्षयनिधि के संसाधन से भरा पड़ा है ।
ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में वैकल्पिक निर्माण सामग्रियों
के रूप में बाँस को आवश्यक समझाने की जागरुकता में सुधार हुआ है ।
परिणामत पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में पर्याप्त कार्रवाई की
गई है । उत्कृष्ट उपलब्धि के रूप में इस संसाधन की पहचान करना और
स्वीकार करना समुचित ही है ।
अत हडको एवं हरिओम आश्रम ट्रस्ट, नाडियाड, गुजरात के संयुक्त प्रायोजन से
हडको ने निर्माण में बांस का प्रयोग विषय पर डिजाइन विचार
प्रतियोगिता का आयोजन किया ।
हडको ने देशभर से कई प्रविष्टियाँ प्राप्त की । इन प्रविष्टियों पर श्री पी
एस राणा, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, हडको, श्री शांति भाई अमीन,
अध्यक्ष, हरिओम आश्रम ट्रस्ट, डा.एस के खंडूरी, निदेशक (वानिकी),
योजना आयोग, श्री बी एस ओबराय, सलाहकार, विज्ञान एवं
प्रौद्योगिकी विभाग, सुश्री संतोष सत्या, विभागाध्यक्ष (आईआईटी)
तथा श्री आर के सफाया, कार्यकारी निदेशक, हडको ने संयुक्त रूप से
पुरस्कारों के बारे मे निर्णय दिया ।
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